जालंधर (Public Updates TV): फिल्लौर से कांग्रेस विधायक विक्रमजीत सिंह चौधरी की पार्टी में वापसी ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। पिछले साल निलंबन झेलने के बाद आज उन्हें कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की अगुवाई में दाखा में आयोजित कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान पार्टी में दोबारा शामिल किया गया। इस मौके पर पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इस अहम मौके पर कांग्रेस सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, भारत भूषण आशु और राणा गुरजीत सिंह जैसे बड़े नाम नदारद रहे।
इससे पहले चरणजीत सिंह चन्नी ने कमलजीत सिंह कड़वल को कांग्रेस में शामिल कराया था, तब राजा वडिंग और रंधावा जैसे नेता मौजूद नहीं थे। इन दोनों घटनाओं ने पार्टी के भीतर दो गुटों की आशंकाओं को हवा दी है — एक गुट चन्नी का, दूसरा राजा वडिंग का।
पार्टी ने अभी तक इन अटकलों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की लगातार गैरहाजिरी से सवाल जरूर उठ रहे हैं।
पूर्व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने भी हाल ही में कड़वल की कांग्रेस में एंट्री पर सवाल उठाए थे और इसे पार्टी प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया था। उनका कहना था कि प्रदेश प्रधान की जानकारी के बिना किसी को पार्टी में शामिल करना अनुचित है।
गौरतलब है कि विक्रमजीत चौधरी, पूर्व सांसद संतोख चौधरी के बेटे हैं। संतोख चौधरी के निधन के बाद जालंधर लोकसभा सीट से टिकट चरणजीत सिंह चन्नी को देने पर विक्रमजीत नाराज हो गए थे और खुलकर विरोध किया था। अब जब राजा वडिंग उन्हें फिर से कांग्रेस में वापस ला रहे हैं, तो माना जा रहा है कि चन्नी इसे लेकर पार्टी हाईकमान के सामने आपत्ति जता सकते हैं।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है।