चंडीगढ़: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बॉर्डर इलाकों में विकास की मांग ने जोर पकड़ा और अब उसका असर साफ दिखाई देने लगा है। केंद्र सरकार ने पांच वर्षों से बंद पड़े बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (BADP) को दोबारा शुरू करते हुए 15 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 6,839 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है।
इस फैसले के पीछे बड़ा योगदान है गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा का, जिन्होंने 29 जुलाई को लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से सवाल पूछते हुए पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों—बमियाल, कलानौर और डेरा बाबा नानक—की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने की मांग की थी।
रंधावा ने यह भी पूछा था कि क्या सरकार सीमा पर स्थित गांवों के विकास को सुरक्षा आवश्यकताओं के साथ जोड़ने के लिए संयुक्त BSF-BADP तालमेल कमेटी बनाने पर विचार कर रही है।
इस सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में बताया कि 2024-25 से 2028-29 तक की अवधि के लिए यह फंड मंजूर किया गया है। पंजाब में फिलहाल गुरदासपुर और पठानकोट के 107 गांवों को योजना में शामिल किया गया है।
हालांकि अमृतसर, तरनतारन, फाजिल्का और फिरोजपुर जैसे संवेदनशील जिलों को इस योजना से बाहर रखा गया है, जबकि इन इलाकों में भी ड्रोन हमलों से इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा था।
गौरतलब है कि BADP योजना पहले भी सीमावर्ती राज्यों के लिए सौ प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजना रही है, जिसके जरिए सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाती थीं।
लेकिन पिछले पांच साल से यह योजना ठप पड़ी थी, जिससे इन इलाकों में विकास कार्य रुक गए थे। अब ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक बार फिर इस योजना की बहाली को स्थानीय सांसद की पहल और केंद्र की सहमति से बड़ी राहत माना जा रहा है।
यह कदम न सिर्फ बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा, बल्कि सीमावर्ती गांवों की सुरक्षा और जीवन स्तर को भी बेहतर बनाने में मदद करेगा।